Hindi urdu sex story & चुदाई की कहानी

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पापा के दोस्त के साथ मेरी माँ की सेक्स कहानी

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मेरे पापा जब दिल्ली में काम करते थे तो मेरी माँ भी शादी के पहले वही पर काम करती थी, दोनों में प्यार हुआ और घर बालों के मर्जी के बिना शादी हो गई, दोनों दिल्ली में ही रहने लगे. आपको मेरी फैमिली का संक्षित विवरण मिल गया है. अब मैं सीधे कहानी पर आती हु.जब मैं छोटी थी, तो पापा और माँ के बीच में हमेशा अनबन रहता था, माँ और पापा को कभी भी सम्मति से रहते नहीं देखा था, पर पापा उस दिन मम्मी से बहुत ही प्यार से बात करते थे, जिस दिन अरुण अंकल आने बाले होते थे, जब वो घर पे आते थे, पापा मुझे पड़ोस बाले आंटी के यहाँ भेज देते थे, पर मैं बहाना बना के आ जाती थी,
जब वापस आती थी तो मुझे अपने माँ पे बहुत तरस आता था, पापा छत पर चले जाते थे, कमरा बंद होता था, चूड़ियों की खनक और आअह आआह आआआह धीरे धीरे धीरे, आआअह आआअह की आवाज अंदर कमरे से आती थी, मैं बहुत परेशान हो जाती थी पर कुछ बोलती नहीं थी, यही सिलसिला चलता रहा. मैं वैसे ही दरवाजा देख कर और वो अवजा सुनकर वापस आंटी के यहाँ चली जाती थी, आती तब थी जब कोई फिर बुलाने आता था, वापस आके मैं माँ को देखती थी, उनके हाथ में कांच की चूड़ियों के निशान होते थे, और कई बार चूड़ियों के टूटने की वजह से जख्म होता था, मैं पूछती थी, की माँ ये कैसे हुआ, तो वो है के टाल देती थी , अरे ये ये तो बेलन से चूड़ियों में लग गया था चूड़ी टूटने की वजह से कांच गड गया था.मेरा कोमल मन भी सब कुछ समझता था, पर मैं लाचार थी, जहा सावन ही आग लगाये तो कौन बुझाए, यही गाना मुझे याद आने लगता था, जब मेरा बाप ही अपनी पत्नी को गैर मर्दों के पास सेक्स करने के लिए मजबूर करता था, तो मैं क्या कर सकती थी. सिलसिला चलता रहा, एक बार तो हद हो गई, माँ नानी के यहाँ जाने के बहाने वो अरुण अंकल के साथ हनीमून पे गई थी, टाइट जीन्स और शर्ट पहन कर, मेरी माँ देखने में काफी सुन्दर है, काफी हॉट है, पर वो जीन्स वगैरह नहीं पहनती थी, आप ये कहानी आप निऊ हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। पर उस कुत्ते की वजह से मेरी माँ को उसके साथ हनीमून पे जाना पड़ा, जब माँ वापस आई तो उनके पास महंगे महंगे गिफ्ट थे, गाल में साफ़ साफ़ और दांत के निशान थे. जब वो निशान पापा देखे तो खुश हुए थे बोले थे लगता है सब कुछ अछा रहा, है ना आशा, माँ ने घूरते हुए नजरों से देखि, और बोली हां जब तूने मुझे दलदल में डाल ही दिया तो करें भी तो क्या.मैं बड़ी हो चुकी थी, अब सब बात और भी साफ़ साफ़ समझने लगी थी, जब पापा ऑफिस में होते तो अरुण अंकल फ़ोन आता था माँ के मोबाइल पे, पर माँ भी उस फ़ोन को उठाने से हिचकिचाती थी, मैं कई बार पापा को बोली की पापा क्या आपके दोस्त का फ़ोन आते रहता है, माँ परेशान हो जाती है आप मना क्यों नहीं करते है. मैं कुछ साफ़ साफ़ बोल भी नहीं सकती थी, वो बड़े प्यार से मुझे समझा देते थे, और कहते थे की मैं बोल दूंगा की फ़ोन नहीं करने के लिए. एक दिन की बात है, पापा को मैंने अरुण अंकल से बात करते हुए सूना की, अरुण अंकल को कल बारह बजे बुला रहे थे, और कह रहे तो की मैं ऑफिस चला जाऊंगा, और मैं अपनी बेटी को भी कही बाहर भेज दूंगा, कुछ पैसे दे दूंगा और कहूँगा तो शॉपिंग कर आओ, शायद अरुण अंकल बोले ठीक है, और उन दोनों ने बात फिक्स कर ली, हुआ भी यही, पापा ने मुझे हजार के एक नोट दिए और बोले मेरी प्यारी बेटी तू अपने लिए कपडे ले आ, तुम्हे कॉलेज के लिए थोड़े कपडे काम पड रहे है, तू बार बार एक ही ड्रेस को पहनती है.मैंने समझ गई की मुझे क्यों भेजा जा रहा था, रात में पैसे दे दिए, और सुबह मुझे करीब १० बजे जाना था, मैं भी चली गई, पापा भी चले गए, माँ भी बाजार चली गई, पापा को कहते सुना की तुम १२ बजे से पहले ही आ जाना वो माँ को कह रहे थे, माँ बोली ठीक है, मैं घर से बाहर तो गई पर 11 बजे ही वापस आ गई, और मैं पीछे दरवाजे से कमरे के अंदर आ गई, पीछे का गेट का चाभी मेरे पास था, कमरे में दो दरवाजा था, मैं कमरे में दाखिल हो गई, मैं गेट बंद ही रहा था, माँ के आने की आहात हुई बारह बज चुके थे, मैं तुरंत ही पलंग के निचे हो गई, पलंग थोड़ा उचाई पर था, अंदर अँधेरा था कोई मुझे देख नहीं सकता था, आप ये कहानी आप निऊ हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। माँ ने दरवाजा खोली और अंदर आई, अरुण अंकल भी साथ थे, दरवाजा बंद कर दी, रूम में लाइट जला ली, उसके बाद अरुण अंकल माँ को अपने बाहों में भर लिया, और कह रहे थे, गजब की चीज हो मेरी जान, तुम मुझे पागल कर दोगी, तेरे बिना मेरी ज़िंदगी कुछ भी नहीं है,माँ कुछ भी नहीं बोल रही थी, धीरे धीरे मैंने सारे कपडे को निचे गिरते देखा पहले साड़ी, फिर ब्लाउज, फिर ब्रेसियर, फिर पेटीकोट, फिर माँ की पेंटी, उसके बाद बारी बारी से अरुण अंकल के कपडे, दोनों लेंगे खड़े थे, माँ की मोटी मोटी जांघ तक दिख रहे थे, उसके बाद अरुण अंकल, माँ को उठा के पलंग पे लिटा दिए, मेरी कानो में सिर्फ आआह आआअह आआआह, और पलंग की चों चों की आवाज आ रही थी, करीब १ घंटे तक मैंने अपने आप को किस तरह से समझाया क्या बताऊँ, मेरी माँ को एक गैर मर्द चोद रहा था, माँ चुद रही थी, अरुण अंकल जैसे कह रहे थे माँ चुप चाप कर रही थी, और एक जोर सी आह के बाद दोनों शांत हो गए, अरुण अंकल कपडा पहने और, चले गए, माँ रोते रोते एक एक कर के सारे कपडे पहनी, मैं भी अंदर चुपचाप रो रही थी. जब माँ बाथरूम गई तो मैं आने का बहाना किया, माँ बोली आ गई बेटी, मैंने कहा हां माँ पर कपडे नहीं लाई, कोई नै डिज़ाइन नहीं था.शाम को पापा आये, हस्ते हुए माँ से पूछा सब ठीक रहा, माँ चुचाप रसोई में चली गई और खाना बनाने लगी, पापा को जवाव दिए बिना. अब क्या बताऊँ दोस्तों मुझे समझ अभी तक नहीं आया है की क्या रिश्ता है, कैसी लगी मेरी माँ की सेक्स कहानी , अच्छा लगी तो शेयर करना , अगर कोई मेरी माँ की चूत की चुदाई करना चाहते हैं तो उसे अब जोड़ना Facebook.com/AnamikaSharma

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